अनंत चतुर्दशी 2025: गणपति विसर्जन की तिथि, शुभ मुहूर्त और प्रमुख परंपराएं
September 1, 2025 | by ar.priyankamalpani@gmail.com
गणपति विसर्जन 2025: अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को विदा करने का समय, शुभ मुहूर्त और धार्मिक रीति-रिवाजों की विस्तृत जानकारी यहाँ पढ़ें।
भारत में भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है। यह वही दिन होता है जब 10 दिनों तक घर-घर और पंडालों में विराजमान गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है। इस दिन धूमधाम से गणपति विसर्जन होता है, जिसे भक्तजन बड़े उत्साह और भावनाओं के साथ मनाते हैं
अनंत चतुर्दशी 2025 की तिथि
अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर 2025, शनिवार को मनाई जाएगी। यह दिन गणपति भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी दिन गणेश विसर्जन किया जाता है।
गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त
अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन का महत्व तभी पूर्ण होता है जब इसे शुभ मुहूर्त में किया जाए।
पंचांग के अनुसार, 2025 में विसर्जन का शुभ समय इस प्रकार रहेगा:
- प्रातःकाल:
- सुबह 07:44 से 09:18 तक
- सुबह 09:18 से 10:52 तक
- सुबह 10:52 से 12:26 तक
- दोपहर:
- दोपहर 01:59 से 03:33 तक
- संध्या वेला:
- शाम 06:41 से 08:07 तक
भक्त अपनी सुविधा और परंपरा अनुसार इनमें से किसी भी मुहूर्त में विसर्जन कर सकते हैं।
गणपति विसर्जन का महत्व
गणपति बप्पा को मिट्टी की प्रतिमा स्वरूप घर या पंडाल में विराजमान किया जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन का अर्थ है बप्पा को जल में लौटाना ताकि वे अगले वर्ष फिर से घर-घर आकर सुख, समृद्धि और खुशियां प्रदान करें।
यह आस्था, भक्ति और नवजीवन का प्रतीक माना जाता है।
गणपति विसर्जन की प्रमुख परंपराएं
- विसर्जन यात्रा – भक्तजन ढोल-नगाड़ों और नाच-गानों के साथ बप्पा की शोभायात्रा निकालते हैं।
- मंत्रोच्चार – “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारे गूंजते हैं।
- जल में विसर्जन – प्रतिमा को नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित किया जाता है। आजकल पर्यावरण बचाने के लिए कृत्रिम तालाबों में भी विसर्जन किया जाता है।
- अनंत सूत्र बांधना – इस दिन अनंत भगवान की पूजा कर हाथ में अनंत सूत्र बांधने की भी परंपरा है, जिससे समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
गणपति विसर्जन का धार्मिक महत्व
“गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इन दस दिनों तक भक्तजन अपने घरों में गणपति की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धा से पूजा करते हैं और उन्हें विविध भोग अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इस अवधि में बप्पा अपने भक्तों के दुख और बाधाओं को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन किया जाता है, जो उनकी विदाई का प्रतीक है। प्रतिमा को जल में विसर्जित करने की परंपरा इस बात का संकेत है कि भगवान अपने धाम को लौट रहे हैं। साथ ही यह जीवन के चक्र का दार्शनिक संदेश भी देता है कि हर शुरुआत का एक निश्चित अंत होता है।”
गणपति बप्पा मोरया! अगले बरस तू जल्दी आ!
❓ अनंत चतुर्दशी 2025 FAQ
1. अनंत चतुर्दशी 2025 कब है?
अनंत चतुर्दशी 2025, 6 सितंबर 2025, शनिवार को मनाई जाएगी। इसी दिन गणपति विसर्जन होता है।
2. अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त क्या है?
अनंत चतुर्दशी पर प्रातःकाल, दोपहर और संध्या वेला में विशेष शुभ मुहूर्त होते हैं। भक्तजन अपनी सुविधा अनुसार इनमें विसर्जन कर सकते हैं।
3. गणपति विसर्जन का धार्मिक महत्व क्या है?
गणपति विसर्जन जीवन की नश्वरता और नवजीवन का प्रतीक है। यह भक्ति, आस्था और कृतज्ञता का पर्व माना जाता है।
4. अनंत चतुर्दशी पर कौन-कौन सी परंपराएं निभाई जाती हैं?
इस दिन गणपति विसर्जन यात्रा, मंत्रोच्चार, अनंत भगवान की पूजा और अनंत सूत्र बांधने की परंपरा होती है।
5. पर्यावरण की दृष्टि से गणपति विसर्जन कैसे किया जाना चाहिए?
आजकल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए मिट्टी या शैवाल से बनी प्रतिमाओं का प्रयोग किया जाता है और कृत्रिम तालाबों में विसर्जन की परंपरा अपनाई जा रही है।
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