अनंत चतुर्दशी 2025: महत्व, पूजा और अनंत सूत्र
August 29, 2025 | by ar.priyankamalpani@gmail.com
अनंत चतुर्दशी का पर्व इस साल 6 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित है, जिन्हें श्रीहरि भी कहते हैं। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं ताकि उनके जीवन के सभी दुख दूर हो सकें और उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो।
अनंत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?
अनंत चतुर्दशी का पर्व भगवान विष्णु के अनंत रूप के प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने संसार में धर्म की स्थापना के लिए कई रूप धारण किए थे। यह दिन विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को उसके पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
अनंत सूत्र बांधने का महत्व
इस दिन भगवान विष्णु के भक्त अपने हाथ पर अनंत सूत्र (चौदह गांठों वाला धागा) बाँधते हैं। यह सूत्र कच्चे रेशम या सूती धागे का होता है और इसमें 14 गांठें होती हैं। ये 14 गांठें 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं, जिन्हें भगवान विष्णु ने बनाया था। इस सूत्र को बांधने के पीछे यह मान्यता है कि यह व्यक्ति को सभी संकटों से बचाता है और उसे जीवन में सुख-शांति प्रदान करता है।
अनंत सूत्र बांधने से क्या होता है?
- सुरक्षा और समृद्धि: मान्यता है कि अनंत सूत्र व्यक्ति को सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से बचाता है।
- स्वास्थ्य लाभ: कुछ लोग मानते हैं कि इसे बांधने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
- मनोकामना पूर्ति: यह सूत्र बांधने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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